आत्मावलोकन(احتساب نفس)
अपनी ख़ूबी पर इतराने से फ़ुर्सत न मिले, तो अपने नक़ाइस और ख़ामियों पर नज़र डालता कौन है? *** दूसरे के फटे में पैर अड़ाने में जब लुत्फ आये, तो अपने गिरेबान और पैबंद को फिर देखता कौन है? *** सारा दिन जब सियासत में ही बसर हो जाये, तो मुल्क की फ़लाह-ओ-बहबूद का ख़याल रखता कौन है? *** जब हर शख़्स ख़ुद को अहल व क़ाबिल समझता हो, तो फिर इस दहर में जाहिल बचता कौन है? ~ राजीव रंजन प्रभाकर