का चुप साधि रहउ बलवाना
का चुप साधि रहउ बलवाना ************************ वानर राज सुग्रीव द्वारा माता सीता का पता लगाने हेतु युवराज अंगद के नेतृत्व में भेजी गई वानरी सेना सिन्धु के तट पर उदास बैठी हुई है. *** गीद्ध जटायु के अग्रज सम्पाती ने इतना तो बता दिया कि माता सीता समुद्र के उस पार स्थित लंका द्वीप में है किन्तु सौ योजन तक विस्तृत समुद्र के उस पार पहुॅंचा कैसे जाय, इसी चिंता में मग्न समस्त वानरवीर किंकर्तव्यविमूढ़ बैठे हैं. सम्पाती ने तो यहाॅं तक कह दिया कि जो आपमें से सौ योजन का सागर लांघ सकता है वही शरीर से बलशाली और साथ-ही-साथ बुद्धि से सम्पन्न वीर हीं माॅं सीता का लंका में पता लगा सकता है. सौ योजन सागर को नांघना कोई हॅंसी-खेल की बात तो थी नहीं! जो नाघइ सत जोजन सागर। करइ सो राम काज मति आगर।। *** अंततः रीछपति जामवंत जी ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा-वानर वीरों! ऐसे चुप्पी साध उदास बैठे रहने से क्या प्रभु श्रीराम का काम हो जाएगा? बड़ी अजीब बात है! तुमलोग अपना-अपना बल तो...