मालिक नहीं सिर्फ़ मैनेजर;बस
घर हो या परिवार या फिर ऑफिस; आप उसके मैनेजर हैं, मालिक नहीं.
मैनेजमेंट बिना किसी राग-द्वेष के करना हमें सीखना है.
***
जैसे-जैसे हम किसी चीज़ के स्वामी होने के भाव से मुक्त होते जाते हैं वैसे-वैसे हीं हमारा कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता चला जाता है.
~राजीव रंजन प्रभाकर
Comments