मालिक नहीं सिर्फ़ मैनेजर;बस

घर हो या परिवार या फिर ऑफिस; आप उसके मैनेजर हैं, मालिक नहीं.
मैनेजमेंट बिना किसी राग-द्वेष के करना हमें सीखना है.
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 जैसे-जैसे हम किसी चीज़ के स्वामी होने के भाव से मुक्त होते जाते हैं वैसे-वैसे हीं हमारा कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता चला जाता है.
~राजीव रंजन प्रभाकर 

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