सम्बन्ध
सम्बन्ध क्या है? मेरे विचार से सम्बन्ध एक प्रकार का अदृश्य बन्धन है। यह रस्सी से निर्मित किसी बन्धन की तरह प्रत्यक्ष दिखाई नहीं देता, बल्कि बुद्धि और अनुभूति के माध्यम से इसका बोध होता है। सम्बन्ध की प्रकृति और प्रगाढ़ता के अनुसार व्यक्ति की स्वतंत्रता भी किसी-न-किसी सीमा तक प्रभावित होती है। सम्बन्ध जितना प्रगाढ़ होता है, व्यक्ति अपने निर्णयों और व्यवहार में उतना ही दूसरे व्यक्ति अथवा सम्बन्ध से जुड़ी अपेक्षाओं, दायित्वों और हितों का ध्यान रखने लगता है। सम्बन्धों का संसार मनुष्य के जन्म लेने और समाज का सदस्य बनने के साथ ही अनेक सम्बन्धों की नींव पड़ जाती है। कुछ सम्बन्ध जन्म के साथ प्राप्त होते हैं, कुछ जीवन में अर्जित किए जाते हैं और कुछ समय, परिस्थिति तथा आवश्यकता के साथ विकसित होते हैं। इस प्रकार सम्बन्धों का संसार निरन्तर विस्तार पाता रहता है। उदाहरण के लिए, जन्म लेते ही मनुष्य किसी का पुत्र अथवा पुत्री बन जाता है। इस प्रकार माता-पिता और सन्तान का सम्बन्ध स्वतः अस्तित्व में आ जाता है। आगे चलकर भाई-बहन, पति-पत्नी तथा अन्य पारिवारिक सम्बन्ध स्थापित होते हैं। फिर आजीविका, सामाजिक सहभ...