ईश्वर में विश्वास का बल
ईश्वर में विश्वास का बल रामचरितमानस में चौपाई का अंश है— मोर दास कहाइ नर आसा। करहि तौ कहहु कहा बिस्वासा॥” इसका सरल अर्थ है—यदि भगवान की आशा छोड़कर कोई किसी व्यक्ति की आशा पर निर्भर हो, तो भगवान कहते हैं कि उस व्यक्ति का कोई क्या भरोसा करे, जो मेरे पर ही भरोसा नहीं करता। इसका सारांश यही है—भरोसा करो तो सिर्फ प्रभु पर; व्यक्ति पर भरोसा मत करो। ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, जिसमें भगवान पर विश्वास कर अपना कार्य या कर्तव्य करते रहने से व्यक्ति को अप्रत्याशित सफलता प्राप्त हुई अथवा वह घोर संकट से अनायास हीं उबर गया है। लेकिन दिक्क़त यह है कि व्यक्ति का स्वभाव ऐसा होता है कि जब तक उसमें अपनी शक्ति रहती है या सामर्थ्य बना रहता है, वह दूसरों को तो क्या, यहाँ तक कि प्रभु को भी कुछ नहीं गिनता। भगवान की याद उसे तब आती है, जब उसकी अपनी बुद्धि एवं शक्ति चुक जाती है। प्रभु तो सदा दयालु हैं कि वे तब भी ऐसे दम्भी एवं अभिमानी पर उस समय उसकी दुर्दशा पर द्रवित हो जाते हैं और कृपा करते हैं। ******* लेकिन ऐसे भी व्यक्ति हैं, जो अपने सभी कर्मों को प्रभु की प्रसन्नता को ध्यान में रखकर करते हैं। इसका फल ...