नींद एक औषधि है
नींद एक औषधि है भगवान ने नींद के रूप में मनुष्य को एक अनुपम उपहार दिया है। मनुष्य ही नहीं, इस संसार का प्रत्येक जीव अपने-अपने ढंग से इस जैविक क्रिया का अनुभव करता है, जिसे हम नींद कहते हैं। मानव जीवन की अनेक जैविक क्रियाओं में नींद का अपना एक विलक्षण स्थान है। श्वसन, पाचन, हृदय की धड़कन जैसी अनेक जैविक क्रियाएँ तो निरंतर चलती रहती हैं, किंतु नींद एक ऐसी जैविक अवस्था है, जिसमें सामान्य मनुष्य अपने जीवन के लगभग एक-तिहाई समय तक रहता है। दिन के चौबीस घंटों में लगभग आठ घंटे का यह समय मनुष्य अपने बाहरी संसार से लगभग अलग होकर नींद को समर्पित करता है। इतना ही नहीं, जाग्रत अवस्था में भी जिन कार्यों को हम अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य मानते हैं, उनके लिए आवश्यक शारीरिक और मानसिक ऊर्जा के पुनर्संचयन में नींद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस दृष्टि से देखें तो नींद केवल विश्राम नहीं, बल्कि जीवन की आवश्यकता है। जिस व्यक्ति को ठीक से नींद नहीं आती, उसके स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। शरीर में थकान बनी रहती है, मन अस्थिर होता है और धीरे-धीरे उसकी कार्यक्षमता भी प्रभावित होने लगती है। इसके ...