क्या है ये ज़िन्दगी---
चाहे कोई करे तनक़ीद अपने यक़ीन पर आगे बढ़ते जाना हीं ज़िंदगी है बिखरने के बाद निखरने के लिए ख़ुद को पहले समेटना हीं ज़िंदगी है दौर ए वक़्त में ख़ुद से ख़ुद को जीत कर निखरना हीं ज़िदगी है जब ख़ुद निखर जायें तो दूसरे की जिंदगी को सॅंवारना हीं ज़िंदगी है जब दूसरे भी सॅंवरते जाए तो मुल्क को सॅंवारना हीं ज़िंदगी है और चाहे कुछ बचे न बचे अपने ज़मीर को बचा कर रखना हीं ज़िंदगी है. बंदे को मौला से कोई अवार्ड मिले न मिले इसका कोई ग़म नहीं ख़ुदा की निगाह में पाक रहने की कोशिश करते रहना हीं ज़िंदगी है. ~राजीव रंजन प्रभाकर १७.०४.२०२६ چاہے کوئی کرے تنقید اپنے یقین پہ آگے بڑھتے جانا ہیں زندگی ہے۔ بکھرنے کے بعد خود کو سمیٹا ہیں زندگی ہے دور وقت میں خود کو خود سے جیتنا ہیں زندگی ہے جب خود نکھر جائے تو دوسرے کو سنوارنا ہیں زندگی ہے جب دوسرے بھی سنورتے جایں تو ملک کو سنوارنا ہیں زندگی ہے۔ ا...