कुछ ख़ुद के बारे में
मैंने अब भोजन करना छोड़ दिया है; क्यों? अरे भाई!फास्ट फूड है न! मैंने अब पानी पीना छोड़ दिया है; क्यों? अरे भाई! कोल्डड्रिंक है न! मैंने अब पैदल चलना भी छोड़ दिया है; क्यों? अरे भाई!ओला-रेपिडो है न! **** मैंने अब सोचना भी छोड़ दिया है. क्यों? ** भाई साहब! मैं ऐसा बेवकूफ थोड़ी हूॅं? मैं तो करने में विश्वास रखता हूॅं; सोचने में नहीं. सोचने में अपना क़ीमती वक़्त भला गॅंवाता कौन है? ** फिर सारे फ़साद और फ़ित्ना की जड़ में ये सोचना हीं तो है! और भला एआइ के रहते सोचना भी कोई बुद्धिमानी है! ***** मैंने भी अब तय कर लिया है---- मैं तब तक कुछ भी नहीं सोचूंगा जब तक एआइ मेरे सामने अपनी हार न मान ले. और हाॅं; चाहे तब तक सोचने की मेरी 'आदत या कूबत हीं क्यों न खत्म हो जाए! ~राजीव रंजन प्रभाकर. ...