मैथिली भाषा'क किछु मौलिक शब्द पर चर्चा
गाम से एक गोटे आयल छला. हमर बेटी हुनका पैर छूबि प्रणाम केलक.
ओ आशीर्वाद दैत कहलैन- नीके रहू.
ओ अभ्यागत हमरा से पूछलैन-इ अपने’क कनकिरबी थिक?
हम कहलिए-हॅं
ओ-वाह, बड्ड नीक.
जखन ओ गेलैथ तऽ हमर बेटी हमरा सॅं पूछलक-पापा ‘कनकिरबी’ मतलब बेटी होता है?
हम- हाॅं,और कनकिरबा का अर्थ बेटा.
बेटी- मैं अनुमान से समझ गई थी.
यद्यपि हमर बेटी’के मैथिली बाजै लै आबै छै. किंतु सामान्य बोलचाल में एहि तरह शब्द’क प्रयोग हमहूॅं तऽ बुझू नहिए करैत छी ते ओ कोना बुझैत.अस्तु
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आय काल्हि जे मैथिली बजनिहार छैथ सेहो मैथिली भाषा केर बहुत रास शब्द सॅं जेना अनभिज्ञे बुझू. एकर अनुभव यदा-कदा हमरा होयत रहैत अछि.
आब मैथिल सब जे छैथ उहो मैथिली बाजैत काल में ‘जलखै’ के ब्रेकफास्ट/नाश्ता बजै छैथ तथा ‘भानस’ के रसोई. तहिना ‘भंसाघर’ आजुक दिन में ‘किचन’ कहि सम्बोधित होयत अछि.
एहि तरहे बहुत रास मैथिली भाषा केर मूल शब्द मैथिलियो भाषा’क बोली-चाली में प्रयोग उत्तरोत्तर कम होयत जा रहल अछि. कथा साहित्य में ध्यान देला पर कतउ-कतउ अवश्य भेंट भऽ सकैछ किंतु बोली चाली में तऽ नहिए’क बराबैर.
एकर परिणाम इ जे मैथिल भाषी केर धिया-पुता सब एहि तरहक शब्द सुनि अचकचा उठैत छैथ. ओ समय दूर नहिं रहत जखन मैथिली’क मूल शब्द बोली-व्यवहार में प्रयोग नहिं रहला’क कारण लुप्त भऽ जायत.
भाषा के पोषण-परिवर्धन के कोन कथा; एतय संरक्षण'क लेल सोचैक आवश्यकता भऽ जायत.
अस्तु.
हमरा सभ गोटे के इ चाही कि अपन बाल बच्चा सब के एहि मूल शब्द से समय-समय पर बातचीत में परिचित कराबैत रही.
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हमरा बुझि पड़ैत अछि जे मैथिली भाषा’क बहुत रास शब्द आब शनै:शनै: बोली व्यवहार में नहिं के बराबर भऽ रहल अछि. हमरा बुझि परय ये जे धीरे-धीरे इ शब्द सब आब लुप्त भऽ के डिक्शनरी’क पन्ना में भेटत. आ मैथिलीए डिक्शनरी कि सब ठाम भेंट जायत?
एहि तरह’क किछु शब्द हम अहिठाम संग्रह करबाक प्रयास केनै छी.
जेना-जेना मोन में आबि रहल अछि तहिना लिख रहल छी; ताहि लेल कोनो क्रम’क विचार नहिं करब.
संगहि कतउ-कतउ किछु शब्द के वाक्य में प्रयोग’क प्रयास सेहो केने छी ताकि ओकर अर्थ बेसी नीक सॅं फरिछा जाय.
नवका मैथिल बच्चा सब इ शब्द सॅं यदि परिचित नय हेता तॅं हुनका लेल ई ज्ञानवर्धक भऽ सकैछ. नहिं ते एहि शब्द’क ज्ञान कम-से-कम मनोरंजक एवं कौतुक’क विषय तऽ अवश्य होयत.
नीचा किछु एहने शब्द लिखलऊं अछि, देखल जाउ.
१.नेना,बेदरा- (बच्चा) हय नेना सब! जाउ दलान पर खेलू.
२.ढ़ौआ-(रूपैया)- आय काल्हि सब किछु बुझू जे ढ़ौए थिक. यदि संग में टाका-कैंचा(रूपया पैसा)नहिं अछि ते केओ मुहों नय दूसत(चिढ़ाना)
३.नचारी(भोला बाबा के स्तुति)-बच्चा एक टा नचारी सुनाबऽ.
५.समदाओन(विवाह’क बाद पुत्री के बिदाई काल’क गीत)-समदाओन गीत गाबैत काल सबहक आंखि में नोर(ऑंसू) आबि गेल रहय.
६.डोमकच्छ- एक तरह’क स्त्रीगण’क आपस में रात्रिकालीन हॅंसी-ठठ्ठा जखन घर से बर-बरियाती कन्यागत ओहिठामक लेल प्रस्थान कऽ जायत छैक आ घर में केवल स्त्रीगण रहि जायत अछि.
७.नुआ(सारी)- हमर तीतल(भीजल) नुआ एहिठाम सुखाबऽ लेल पसारल रहय? कतय बिला(गुम)गेलय?
८.तिमन(तरकारी)-रौ! आय कि सब तोरा घर में तिमन बनल छौ? हमर ओहिठाम त अखन कलउ(भोजन) के कोन कथा जलखैयो नहिं बनल अछि.
९.चिनुवार(चुल्हा’क ऊपर बनल ताखा)- चिनुवार पर सबटा चीज अजबारि के राखि देने छी. अपने से काढ़ि कऽ खा लेब, हमरा बेर (लेट) भऽ रहल अछि.
१०. अपरतीब(बिधुआएल, हीनभावना सॅं ग्रसित) ओना अपरतीब जोंकॅं कियेक ठाढ़ जी? एम्हर आबू.
११.खुरलुच्ची, हुरहुट्टी (बच्चा जे बदमाश वा शैतान हो)- छौंरा छै ते एक बित के मुदा बड्ड खुललुच्ची.
१२. असला-खसला(मोटा-चोटा)- आब हम अपन असला-खसला ओतय लऽ जा रहल छी किएक ते मास भइर सिमरिये रहैक बिचार अछि.
१३. कचकचेनाय-(चिढ़ैनाय)-ओकरा जे तों कचकचबै छी तय नै तोरा गुदानै (regard)छौ. ओना में तोरा के मोजर(value)देतौ?
१४.ओनामासीधं(ओम नमः सिद्धम् मंत्र के लोक सब बोली चाली में बजैत छैथ)- आबैय ओनामासीधं नय बुझैत छी अपना के आचार्ये!
१५. कठकोंकाॅंड़ि(काठसन कठोर, very difficult person)- हौ हुनका समझैनाय बड्ड कठिन. ओ अपने बड़का कठकोंकाॅंड़ि छै.
१६.असोकर्य(असुविधा lack of comfort)-एहिठाम डेरा खसाएब बड्ड असोकर्य. कोनो दोसर ठाम हेरू(खोजू)
१७. एकतूरिया(समवयस्क)- हम तोहर एकतूरिया जे तों हमरा से रभैस( मनोरंजक गप्प-सप्प)रहल छैं?
१८.हथौड़िया पसारनाय( कोनो प्रिय वस्तु’क गुम भेला उत्तर अन्हार धुन्हार में अप्रतिभ भऽ के चारु कात खोजनाय) कथि हेरा गेल यौ? एना हथौड़िया पसारि कि खोजि रहल छी?
१९. उकटा-उकटी-क्रोध में परस्पर एक दोसर’क भूतकाल में कैल गेल सहायता के उकटनाय (उल्लेख करनाय)
२०. चिल्काउर- प्रसूती स्त्री जकर चिल्का कोरा 'क (गोदी के)दूधपिया बच्चा अखन धैर दूधे पिबैत छै - चिल्काउर'क स्वास्थ्य खातिर बूझू जे इ औषधि रामेबाण छै.
२१.अछोप(अस्पृश्य)- हमरा अहाॅं अछोप बुझलौं तैं ने हमरा निमंत्रण नहिं देल.
आब कोनो दोसर दिन.
राजीव रंजन प्रभाकर
२३.१२.२०२५.
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