जो ला न सको छ: तुम तो

जो ला न सको छ: तो अपनों की गोटी हीं काटो
मौका़' देखकर जैसे भी हो अपनी गोटी लाल करो
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अच्छी-अच्छी बातें कह वा'इज़ कहलाना मक़सूद है
सबके सर में यही है सौदा यही अब वाहिद फ़तूर है 
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कौ़ल और फे'ल में फ़र्क़ अब चौंकाने वाली बात नहीं 
अगर एक सा हो मा'लूम तो फिर सहसा हो विश्वास नहीं.
              ~राजीव रंजन प्रभाकर 
वा'इज़-उपदेशक
मक़्सूद-उद्देश्य
सर-दिमाग़
सौदा-दीवानगी
नुमायाॅं-प्रत्यक्ष
फ़तूर- बेचैनी, खोट ख़राबी
क़ौल-कथनी
फ़ै'ल-करनी
फ़र्क़-अंतर

جو لا نہ سکو چھہ تو اپنوں کی گوٹی ہیں کاٹو
موقع دیکھ کر جیسے بھی ہو اپنی گوٹی لال کرو
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اچھی-اچھی باتیں کہکر واعظ کہلانا مقصود ہے 
سب کے سر میں یہی ہے سودا یہی اب نمایاں فتور ہے۔
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قول اور فعل میں فرق اب چونکانے والی بات نہیں 
اگر ایک سا ہو معلوم تو پھر سہسہ ہو وشواس نہیں۔
~بصد احترام 
راجیو رنجن پربھاکر

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