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Showing posts from June, 2026

गङ्गास्मरण

गङ्गास्मरण ********* स्मरेन्निलिम्पनिर्झर्याः कलकलनिनादम्। या प्रभूता शिवस्य जटाकपर्दात्॥ भजेन्नित्यं विष्णुपदीं नूपुरध्वनिमधुराम्। या प्रददाति विष्णुपदसान्निध्यम्॥ पिबेद् विष्णुचरणधोवनजलम्। यदुच्यते धरायां गङ्गाजलम्॥ निमज्जेद् धर्मसेवी गङ्गाजले। या ददौ जानक्यै आशीर्वचनम्॥ जपेन्नित्यं गङ्गातटे रामनामामृतम्। यत् कलौ धर्मार्थकाममोक्षसाधनम्॥ **************************** मा कुरु संशयम् मां कुरु संशयम्।  इदमेव औषधि संसारतापनाशनम्।। (स्वरचित) ~ राजीव रंजन प्रभाकर                *** हे भक्तगण! आपलोग देवनदी की निर्झर करती कलकल निनाद का स्मरण करें जो आशुतोष शिव के जटाजूट से निकलती है. भगवान विष्णु के सान्निध्य की प्रदायिनी नुपुर ध्वनिरूप विष्णुपदी को भजें. भगवान विष्णु के चरण धोवन जल जिसे इस धरती पर गंगाजल कहा गया है,को पियें. जिस देवनदी ने जगज्जननी जानकीजी तक को आशीर्वाद दिया उसी नदी के जल में डुबकी लगाएं. गंगा तट पर आसन लगा कर रामनाम अमृत का जप के रूप में पान किया करें जो इस कलियुग में धर्म,अर्थ, काम और मोक्ष सभी को रागपूर्वक दे देनेवाला है.   ...

भारतीय संस्कृति की एक झलक

भारतीय संस्कृति की एक झलक              ********* महाराणा प्रताप तेज बुखार से तप रहे थे. सारा शरीर भट्ठी की तरह जल रहा था. बगल में बैठी महारानी किंचित चिंतित उनकी देखभाल कर रहीं थीं.                ***** तभी शिविर के बाहर कर्त्तव्यस्थ प्रहरी की आवाज़ आती है.  महाराणा की जय हो!वीरवर उज्ज्वल सिंह महाराणा से मिलने की अनुमति चाहते हैं. महाराणी (महाराणा का इशारा पाकर) प्रहरी को ---उन्हें प्रवेश करने दिया जाए.                 *** कुछ हीं देर में उज्ज्वल सिंह महाराणा के सामने उपस्थित होकर उनका विनम्रतापूर्वक अभिवादन कर एक ओर खड़े हो जाते हैं. महाराणा-कहो उज्ज्वल सिंह! क्या ख़बर लाए हो. उज्ज्वल सिंह- महाराणा की जय हो! समाचार बहुत ही शुभ एवं हर्षवर्धक है. बादशाह अकबर स्वयं किसी आकस्मिक कारण से दिल्ली कूच कर गए और इस प्रकार बादशाह की अनुपस्थिति में सेनापति अब्दुर्रहीम खानखाना के नेतृत्व में लड़ रही मुगलों की सेना को आपके वीर सुयोग्य पुत्र युवराज जू (अमरसिंह) ने बुरी तरह परास्त कर...

डीए बला एरियर

डीए बला एरियर  ************* आय आफिस से सबेरगर लौट एलौं, सब दिन तै लेटे भऽ जाय ये. सब दिन आफिस टाइम के बाद फेर बड़का-बड़का हाकिम के भीसी-भीसी-भीसी; बूझू जे सम्पूर्ण व्यवस्था'क संचालक इ भीसीए महाराज भऽ गेल छथिन.                **** हम-माय! घर में तू असगरे छी! कनिया(हमर पत्नी) कतय गेलौ? हुनका नै देखै छिए? माय-ओ कनि काल भेलय बजार दिस गेल छथिन. कहलखिन हमरा जे माॅं जी एक घंटा में आ रही हूॅं 'माउल' से; वैह बड़का दोकान जतय एक बेर तूॅं हमरा देखाबऽ लेल ल गेल छलैं.               *** माय(हमरा चाय दैत)-आय रौ बौआ! इ 'डीए बला एरियर' कथी होयत छै? हम(चौंक के)-माय! तोरा इ सब बुझै के कोन जरूरी प‌इर गेलौ? तूॅं कि करबिही इ सब जाइन के? माय-धौ; हमरा जानय के कोन जरूरी रहत! तोरे देखै छियौ जे जब ने तब बहुरिया पूछैत रहै छौ जे 'डीए वाला एरियर' अभी तक हमको क्यों नहीं दिये हैं? इ जे कथू होयत होय हम नै बुझै छिए बरु तूॅं दै किएक नै दय छी हुनका?अनेरो माथ भुकबैत रहय छौ. हम- मने दरमाहा वला सब टा रूपैया तऽ ओ हमरा से झाइरे लय ये;आ जे किछु बाहर...