लहज़ा तल्ख़ चेहरा सख़्त

लहज़ा तल्ख़ चेहरा सख़्त
ओहदा ऊॅंचा ढ़ीला नफ़्स
अकड़ ऐसा मानो हो सूखा शजर
न दे कोई छाउॅं न कोई समर
हो जब ऐसा हाकिम-ए-तख्त
मत जाओ ऐसे साहब के दर
           ~राजीव रंजन प्रभाकर 
[शजर-पेड़
समर-फल
तल्ख़- स्वभाव की उग्रता 
लहज़ा-बात करने व पेश आने का ढ़ंग 
नफ़्स-इंद्रिय संयम(आत्मनियंत्रण)
दर-चौखट/दरवाज़ा 
हाकिम-ए-तख्त-कुर्सी पर काबिज़ साहब] 

لہجہ تلخ چہرا سخت 
عہدہ اونچہ دھیلا نفس
اکڑ ایسا مانو ہو سوکھا شجر
نہ دے کوئی چھاؤں نہ کوئی ثمر 
ہو جب ایسا حاکم تخت
مت جاؤ ایسے صاحب کے در
~بصد احترام 
راجیو رنجن پربھاکر

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