मित्रों! यह संसार एक सिनेमा है.

मित्रों!यह संसार एक सिनेमा है.
सिनेमा का मुझे हीरो नहीं बनना है.
अभिनेता भी नहीं बनना है. 
न साइड रोल कोई करना है.
केवल बैठकर चुपचाप इसे देखने की चाहना है. 
निर्माता-सह-निर्देशक के निर्माण-निर्देशन को कोशिश कर समझना है. 
समझ नहीं पाने पर घर जाकर सो जाना है.
सोना, उठकर बैठ देखना और सोचना 
फिर भी निर्देशन की बारिकियों को समझ नहीं पाना है.
तब भी जीवन भर यही क्रिया दुहराना है.
मित्रों! यह संसार एक सिनेमा है.
             ~राजीव रंजन प्रभाकर.

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