कुछ इसी तरह से जिए जा रहा हूॅं

कुछ इसी तरह से जिए जा रहा हूॅं
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जो हासिल है उसकी क़द्र नहीं 
गै़र हासिल के लिए मरे जा रहा हूॅं,
    कुछ इसी तरह से जिए जा रहा हूॅं। 
जो मुमकिन है उसके लिए कोई मेहनत नहीं
नामुमकिन के पीछे दौड़े जा रहा हूॅं,
    कुछ इसी तरह से जिए जा रहा हूॅं।
मेरी परेशानी की अहमियत क्या है उनकी नज़रों में पता नहीं 
फिर भी उनको मुसलसल अपना मसला सुनाए जा रहा हूॅं,
    कुछ इसी तरह से जिए जा रहा हूॅं।
'आस' और 'काश' के बीच ज़िंदगी को झूलती देख 
दिमाग़ को दरहम-बरहम किए जा रहा हूॅं,
  कुछ इसी तरह से जिए जा रहा हूॅं ।
अच्छा लिखने की ख़्वाहिश में 
 अंट-शंट लिखे जा रहा हूॅं,
कुछ इसी तरह से जिए जा रहा हूॅं।
           ~राजीव रंजन प्रभाकर

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