महाप्रयत्नशील महानशक्तिशाली राजा विश्वामित्र के ब्रह्मर्षि बनने की कथा
विश्वामित्र को राजा कहना सुनने में थोड़ा अस्वाभाविक लगता है क्योंकि जनमानस में वे ऋषि के रूप में हीं जाने जाते हैं.ऋषि भी ऐसे वैसे नहीं बल्कि ब्रह्मर्षि वशिष्ठ के समकक्ष! न उनसे जरा भी कम न ज्यादा. अपने चिरविरोधी वशिष्ठ के मुख से उन्होंने अपने लिए ब्रह्मर्षि कहलवा के ही अपने तप की पूर्णाहुति की. यही इस कथा का climax है ******************************************** किंतु उनकी कथा का आरंभ उन्हें राजा कह के ही हो सकता है क्योंकि विश्वामित्र जन्म से एक क्षत्रिय वंशज राजा ही थे. यह उनका दुर्धष तप हीं था जिसके बदौलत वे ब्रह्मर्षि कहलाये. विश्वामित्र के एक प्रतापी क्षत्रिय वंशज राजा से ब्रह्मर्षि होने की कहानी उनकी ब्रह्मर्षि वशिष्ठ से सुदीर्घ संघर्ष और उसमें उन्हें मिली पराजय की कहानी है. बाल्मीकि रामायण में इसका विस्तार से किंतु सुंदर वर्णन है. यह संघर्ष कथा अत्यंत रोचक तो है ही इससे यह भी सीख लिया जा सकता है क...