मैथिली भाषा'क किछु मौलिक शब्द पर चर्चा
गाम से एक गोटे आयल छला. हमर बेटी हुनका पैर छूबि प्रणाम केलक. ओ आशीर्वाद दैत कहलैन- नीके रहू. ओ अभ्यागत हमरा से पूछलैन-इ अपने’क कनकिरबी थिक? हम कहलिए-हॅं ओ-वाह, बड्ड नीक. जखन ओ गेलैथ तऽ हमर बेटी हमरा सॅं पूछलक-पापा ‘कनकिरबी’ मतलब बेटी होता है? हम- हाॅं,और कनकिरबा का अर्थ बेटा. बेटी- मैं अनुमान से समझ गई थी. यद्यपि हमर बेटी’के मैथिली बाजै लै आबै छै. किंतु सामान्य बोलचाल में एहि तरह शब्द’क प्रयोग हमहूॅं तऽ बुझू नहिए करैत छी ते ओ कोना बुझैत.अस्तु ********************************************** आय काल्हि जे मैथिली बजनिहार छैथ सेहो मैथिली भाषा केर बहुत रास शब्द सॅं जेना अनभिज्ञे बुझू. एकर अनुभव यदा-कदा हमरा होयत रहैत अछि. आब मैथिल सब जे छैथ उहो मैथिली बाजैत काल में ‘जलखै’ के ब्रेकफास्ट/नाश्ता बजै छैथ तथा ‘भानस’ के रसोई. तहिना ‘भंसाघर’ आजुक दिन में ‘किचन’ कहि सम्बोधित होयत अछि. एहि तरहे बहुत रास मैथिली भाषा केर मूल शब्द मैथिलियो भाषा’क बोली-चाली में प्रयोग उत्तरोत्तर कम होयत जा रहल अछि. कथा साहित्य में ध्यान देला पर कतउ-कतउ अवश्य भेंट भऽ सकैछ किंतु बोली चाली में तऽ नहिए’क ब...