हे हनुमान गिरिधारी!
हे हनुमान गिरिधारी!
कौन सा काज आपके लिए है भारी!
आप तो ठहरे कुकाठ लिए वज्र-कुल्हाड़ी!
तो कीजिए न सिंहनाद और गर्जना भयकारी!
हो जाय जिससे दुश्मन के दिल में
हार्ट-अटैक भारी!
और जिससे वे तुरंत हो जाएं बिना हमसे लड़े
खड़े-खड़े धराशायी!
***
आप तो जानते ही हो -------
इस भक्त की आप हीं एकमात्र शक्ति हैं सारी।
फिर क्यों है आपकी कृपा ऐसी विलम्बकारी?
हे हनुमान गिरिधारी।।
हे हनुमान गिरिधारी।।
हे हनुमान गिरिधारी।।
~राजीव रंजन प्रभाकर
Comments