भाय कुभाय अनख आलसहूॅं
भाय कुभाय अनख आलसहूॅं ************************************** संसार में प्रायः सभी लोग ईश्वर का नामोच्चार या नाम स्मरण अनिष्ट के निवारण वा अभीष्ट की प्राप्ति के लिए हीं करते हैं. इसके अतिरिक्त मोहमुक्त एवं नामनिष्ठ संत श्रद्धावश अपने तत्व जिज्ञासा के समाधान हेतु अथवा अपने तत्व ज्ञान के संरक्षण हेतु भी ईश्वर का नाम लेते हैं. *** इस प्रकार ईश्वर का नाम लोग या तो भयवश या लोभवश या श्रद्धावश लेते हैं. लेकिन ईश्वर का नाम किसी को क्रोधवश लेते नहीं सुना है.देवर्षि नारदजी अपवाद हैं. कारण साफ है कोई अपने से बलवान या सामर्थ्यवान पर क्रोध नहीं कर सकता है; यह अनुभव सिद्ध तथ्य है. हाॅं;ईश्वर को कोसते हुए हमने जरूर सुना हैं. क्षोभ और स्तोभ दोनों में ईश्वर का नाम ...