अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया
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 अस्यां तिथौ क्षयमुर्पति हुतं न दत्तं ।
 तेनाक्षयेति कथिता मुनिभिस्तृतीया ।
 उद्दिश्य दैवतपितृन्क्रियते मनुष्यै: ।
 तत् च अक्षयं भवति भारत सर्वमेव ।। – मदनरत्न
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अर्थ : भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं-हे राजन! इस तिथि पर किए गए दान व हवन का क्षय नहीं होता है; इसलिए हमारे ऋषि-मुनियों ने इसे ‘अक्षय तृतीया’ कहा है.
इस तिथि पर भगवानकी कृपादृष्टि पाने एवं पितरों की गति के लिए की गई विधियां अक्षय-अविनाशी होती हैं.
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Today whatever you do or have done towards the good & welfare of either yourself or your family or your neighborhood or your society or your country or the entire humanity; they stand to flourish without any decay.
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So do good by your thoughts, words and deeds. 

R.R.Prabhakar.
अक्षय तृतीया.

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