जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, उपरोक्त का आशय चार साधनों के समूह से है. ये कौन से साधन हैं जो मनुष्य को बन्धन से मुक्त करते हैं-इसे आचार्य शंकर ने स्वरचित ग्रंथ 'विवेक-चूड़ामणि' मे...
प्रस्तुत है कविवर गोपाल दास नीरज की एक कविता ** जिन मुश्किलों में मुस्कुराना हो मना उन मुश्किलों में मुस्कुराना धर्म है ** ***************************** जिन मुश्किलों में मुस्कुराना हो मना उन मुश्किलों में मुस्कुराना धर्म है। १. जिस वक़्त जीना ग़ैर मुमकिन सा लगे उस वक़्त जीना फ़र्ज़ है इंसान का, लाज़िम लहर के साथ तब है खेलना, जब हो समन्दर पे नशा तूफान का जिस वायु का दीपक बुझाना ध्येय हो उस वायु में दीपक जलाना धर्म है। २. हो नहीं मंज़िल कहीं जिस राह की उस राह चलना चाहिए इंसान को जिस दर्द से सारी 'उमर रोते रहे वह दर्द पाना है ज़रूरी प्यार को जिस चाह का हस्ती मिटाना न...
गोस्वामी तुलसीदासजी ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की मूर्ति थे। उनके द्वारा रचित रामचरितमानस एक सर्वांग सुंदर ग्रंथ है जिसके बारे में मान्यता है कि गोस्वामी जी ने इसकी रचना भगवान गौरीशंकर की आज्ञा से किया। वैसे तो इस ग्रंथ की रचना तुलसीदासजी ने अपने इष्टदेव भगवान श्रीराम के चरित्र का वर्णन अपनी भाषा में कर अपने चित्त को सुख प्रदान करने के लिए हीं किया किंतु इससे भविष्य में होने वाले हुए लोकोपकार का अनुमान कदाचित गोस्वामी जी को भी नहीं रहा होगा। भगवान श्रीराम के प्रति अपनी अनन्य भक्ति को केंद्र में रखकर गोस्वामी जी ने जिस तरह से लोकनीति,राजनीति कर्म,धर्म,अध्यात्म,योग,दर्शन,ज्ञान,त्याग,प्रेम और वैराग्य सहित जीवन के विविध पक्षों से सम्बंधित आदर्श मूल्यों एवं तत्वों को उन्होंने इसमें जो सरल,सुबोध एवं सुग्राह्य शैली में सुंदर और सुरूचिपूर्ण ढंग से पिरोया है,उसका दर्शन अन्यत्र दुर्लभ है. यह उनके विशाल एवं अथाह आध्यात्मिक तथा व्यावहारिक अनुभवसंचित ज्ञान का दिग्दर्शन कराता है। ******************************************************* रामचरितमानस में रामकथा के माध्यम से वर्णित जी...
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