तात्विक बातें

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            🍁 *सागरके मोती*

*भविष्य की चिन्ता न करके विचार करे, पर भूत को बिल्कुल छोड़ दे।* 

तत्व सदा वर्तमान रहता है। हम सिनेमा में भूत-भविष्य-वर्तमान को अपनी दृष्टि से देखते हैं, पर फिल्म में क्या ये तीन काल हैं ? उसमें तो सब कुछ वर्तमान है। *जैसे सिनेमा अँधेरे में दीखता है, प्रकाश में नहीं, ऐसे ही संसार अज्ञान रूपी अन्धकार में दीखता है, ज्ञानरूपी प्रकाश में नहीं।*

ज्ञान में भूत भविष्य वर्तमान है ही नहीं। जैसे सिनेमा में पर्दा ज्यों-का त्यों रहता है, उसमें कोई फर्क पड़ता ही नहीं, ऐसे ही तत्व ज्यों-का-त्यों रहता है। 

*राम ! राम !! राम !!!*
परम पूज्य स्वामी रामसुखदासजी महाराज.

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