Posts

Showing posts from September, 2025

डूबते हुए को हाथ पकड़कर बचाना

डूबते हुए को हाथ पकड़कर बचाना  ************************************* क्या आपने नदी अथवा तालाब में डूबते हुए को किसी व्यक्ति द्वारा डूबते का हाथ पकड़कर बचाते हुए देखा है?  नहीं न! कारण स्पष्ट है. हाथ पकड़कर डूबते हुए को बचाने का प्रयास करने वाले की स्वयं भी डूब जाने की पूरी गारंटी है.  क्योंकि डूबने वाला उसे जोर से पकड़ लेता है और परिणाम है कि वह बचाने वाले को भी अपनी ओर खींच लेता है.  इस प्रकार वह स्वयं तो डूबता हीं है बचाने वाले को भी डूबो देता है.  यही कारण है कि जो किसी डूबते हुए को बचाने का प्रयत्न करता है वह दूर से कोई वस्त्र अथवा डोरी डूबने वाले की तरफ फेंक कर उसे पकड़ने का इशारा करता है ताकि दूसरे छोर को खींच कर उसे बचाया जा सके. ********************************************** एक सर्वसमर्थ प्रभु श्रीराम हीं ऐसे हैं जो भवसागर में डूबते हुए अपने सेवक जो उन पर हीं पूरी तरह से आश्रित रहता है, उसे उसका हाथ पकड़कर कर बाहर खींच लेते हैं.  साधारण नदी, तड़ागों की बात कौन कहे वे चाहें तो भवसागर में डूबते उतराते अपने भक्तों को हाथ पकड़कर कर भवसागर से उबारकर उसे ...

हिंदी और अंग्रेजी की प्रियता का पैमाना-मेरे लिए

---हिंदी--- हिंदी मुझे प्रिय है उतना  जितना           भालू को शहद          खरगोश को गाजर           बंदर को केला          घोड़े को चना          हाथी को केतारी          बच्चे को मिठाई  अंग्रेजी मुझे उतना ही प्रिय है   जितना           स्टुडेंट को एक्जामिनेशन           एसपिरेंट्स को कम्पिटीशन           लीडर को इलेक्शन           पेशेंट को आपरेशन           विज्डम को टेम्प्टेशन          प्रोफेशनल्स को रेपुटेशन  ****       हिंदी दिवस की अनंत शुभकामनाएं             हिंदी भारत का भविष्य बने                              ...

जब और तो

जब मंज़िल का पता न हो  तो  जिस राह पर चलते जा रहे हैं  वही आख़िरत में मंज़िल बन जाती है. ** जब 'अपना' कोई न सुने दर्द  तो  जो सुनने को तैयार हो वहीं अपना कहलाती/ता है ** जब जाने वाला गिला भूल कर लौट आए  तो  उसे ठुकराना भी फिर ग़ैर वाजिब है. ** किस के दिल में क्या बसता है यही बात  तो  पहले ख़ुद के दिल से पूछना भी मुनासिब है. **       ~राजीव रंजन प्रभाकर. جب منزل کا پتہ نہ ہو  تو  جس راہ پر چلتے جا رہے  وہی آخرت میں منزل بن جاتا ہے۔ ** جب اپنا کوئی سنے ن درد  تو  جو سننے کو تیار ہو وہی اپنا کہلاتی/تا ہے  ** جب جانے والا گلا بھول کر لوٹ آئے  تو اسے ٹھکرانا بھی پھر غیر واجب ہے۔ ** اس کے دل میں کیا بستا ہے یہی بات  تو   پہلے خود کے دل سے پوچھنا بھی مناسب ہے۔ ~بصد احترام  راجیو رنجن پربھاکر

सलाह.

सलाह. ***** एक जमाना था जब लोग अपने से बड़े बुजुर्गों से सलाह लेने आया करते थे. सलाह देने वाले को भी स्वयं के महत्वपूर्ण होने का अहसास होता था.  किंतु आज स्थिति दूसरी है.   आज के इंटरनेट वो कृत्रिम प्रज्ञा(Artificial Intelligence) के इस युग ने प्रायः हर किसी को समान रूप से बुद्धिमान बना दिया है.       सभी के पास प्रायः उतनी हीं सूचना रहती है जितना दूसरों के पास. साथ हीं निर्णय लेने के लिए जितनी सूचना का होना आवश्यक होता है वह हर किसी के पास कमोवेश बराबर परिमाण में हीं रहता है.           इसलिए आज का जमाना किसी को सलाह देने का नहीं रह गया है. ***************************************  वैसे तो बिना मांगे सलाह देना नहीं चाहिए; मेरे विचार से तो अब मांगने पर भी नहीं देना चाहिए. इधर-उधर की बात कर के टाल देना चाहिए.               जानते हैं क्यों?  सलाह मांगने वाला अपना निर्णय पहले हीं ले चुका होता है. आपसे सलाह मांग कर वह आपका सिर्फ व्यू प्वाइंट जानना चाहता है.        ...

Oh Sanskrit !

Oh Sanskrit! I didn't give you your due while I was a student.  I thought you to be merely a language of little relevance in view of my inclination to pursue science in college. You appeared to me as a load to get rid of by passing the exam anyway. Moreover,for long as a student and many years even after that,I remained under the impression that you are the language of rituals. More deplorably,I associated you,not without reason,with a particular section of society.  How mistaken I was to remain under such a falsely concluded impression!           As I grew up I began to feel your true worth in shaping an individual as a worthy member of the society. Slowly slowly as I started enhancing acquaintance with you I realised that - 1.You are not just a language but much more than that. While other languages are mere mediums of communication you are the creator and nourisher of all that is good in an individual. 2.While other languages compete unhealthily wit...