महादेव स्तुति.
यस्य स्मरणमात्रेण दृश्यते जगत् हस्तामलकसम। नमाम्यहम् तम् महायोगी अजमनादिम् महेश्वरम्।। (जिसके स्मरण मात्र से सम्पूर्ण जगत हथेली पर रखे ऑंवले के बराबर दिखता है उस अनादि,अजन्मा एवं महायोगी महेश्वर को मैं प्रणाम करता हूॅं.) ***** यस्य वामांके विभाति अन्नपूर्णा मातापार्वती। नमाम्यहम् तम् आशुतोष: त्र्यंबक: महेश्वम्।। (जिनके वाम भाग में अन्नपूर्णा माता पार्वती शोभित हो रही हैं उन आशुतोष त्रिनेत्र सम्पन्न महेश्वर को मैं प्रणाम करता हूॅं.) ***** यस्य भाले शोभते मयंकश्च गंगा त्रिपथगामिनी। नमाम्यहम् तम् भुजंगभूषित सर्वलोकमहेश्वरम्।। (जिनके मस्तक पर चंद्रमा और त्रिपथगामिनी गंगा शोभायमान है उन भुजंगाभूषण से भूषित सर्वलोक महेश्वर को मैं प्रणाम करता हूॅं.) ***** यस्य रामभद्रास्ति एकमात्र स्वामी सखा सेवक: नमाम्यहम् तम् विश्वनाथं उमापति महेश्वरम्।। (जिनके श्रीराम स्वामी सखा और सेवक एक साथ त...